तेरा सत् चित् आनन्द रूप
तेरा सत् चित् आनन्द रूप
कोई कोई जाने रे
मन वाणी का तू है दृष्टा (3)
वेद वचन का तू है सृष्टा (4)
अनुभव सिद्ध अनूप
कोई कोई जाने रे
तेरा सत् चित् आनन्द रूप
कोई कोई जाने रे
जन्म मरण तेरा धर्म नहीं है (5)
पाप पुण्य तेरा कर्म नहीं है (6)
तू है पुण्य स्वरूप
कोई कोई जाने रे
तेरा सत् चित् आनन्द रूप
कोई कोई जाने रे
सूर्य चन्द्र में तेज है तेरा (7)
अग्नि में भी ओज है तेरा (7)
तू अति तेज स्वरूप (7)
कोई कोई जाने रे
तेरा सत् चित् आनन्द रूप
कोई कोई जाने रे
तीन लोक का तू है स्वामी
घट घट व्यापक अन्तर्यामी
ज्यों माला में सूत
कोई कोई जाने रे
तेरा सत् चित् आनन्द रूप
कोई कोई जाने रे










