तीन ओर जल निधि भारत माँ के चरण पखारे।

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तीन ओर जल निधि भारत माँ के चरण पखारे।

तीन ओर जल निधि
भारत माँ के चरण पखारे।
रवि रश्मियाँ आंगन को
जिसके हर रोज बुहारें॥
हिमालय रखवाला है
मेरे देश का ॥ टेक ॥

असम अंग मेघालय मन
बंगाल दर्द कवियों का।
मध्य प्रदेश बिहार भोजपुरी
चलन लोक गीतों का ॥
मगध उजाला है मेरे देश का॥1॥

महाराष्ट्र मुख, तमिल नासिका,
केरल कान का कुण्डल
कर्नाटक है कान, स्वर्ण की
आन्ध्र आँख का काजल ॥
उड़ीसा दुशाला है मेरे देश का॥2॥

सिक्किम स्वर और गीत
है गोवा, प्राण है पांडेचेरी।
जहां प्रकृति देवी ने
अपनी सुन्दरता बखेरी ॥
दीप निराला है मेरे देश का॥3॥

माला है गुजरात गले की
और कश्मीर मुकुट है।
पंजाब हिमाचल हरियाणा
के योद्धा बड़े विकट हैं॥
भार संभाला है मेरे देश का॥4॥

पग उत्तर प्रदेश है
राजस्थान की पावन मांटी।
जहाँ प्रताप ने यवनों के
रंगी रक्त से हल्दी घाटी॥
ऐसा भला है मेरे देश का॥5॥

तुलसी सूर कबीर और
बुद्ध महावीर गुरु नानक ।
इन सबका आशय पढ़लो
सत्यार्थप्रकाश में कर्मठ॥
ग्रन्थ आला है मेरे देश का॥6॥