हरते हो सब की पीर तुम
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ईश महिमा हे अनन्त देव तू महान से महान है।विश्व की हर एक चीज में विराजमान है।हे अनन्त देव तू
ईश महिमा दुनियाँ बनाने वाला, दुनियाँ मिटाने वाला,सब का है दाता भगवान्, माने न माने इन्सान ।रंग-रंग के फूल खिलाए,
ईश महिमा तूने बनाया है, ये सब जहान।तू है महान, प्रभु तू है महान।। सारे जगत का मालिक, तू ही
ईश महिमा ईश्वर तेरी महिमा का न, पाया पारावार है।तू ही है निर्माता जग का तो तू ही सर्वाधार है।।रंग-बिरंगे
ईश महिमा ईश्वर से महान, कोई और नहीं है।उस प्रभु के समान, कोई और नहीं है।।जग रचता पालन करता, वही
ईश महिमा हम आये तेरे द्वार नमस्कार-नमस्कारसूरज और चाँद में तेरा ही उजाला है तेरा ही उजाला है,तूने पहन रखी
ईश महिमा प्रणाम कोटि-कोटि, सारे जहाँ के वाली।अद्भुत है तेरी रचना, हर शै तेरी निराली।। कण-कण में तू व्यापक, सूक्ष्म
ईश महिमा हे प्रभु । परमपिता ! तुम गुणों की खान हो।तुम अनादि तुम अनन्त, पूर्ण तुम्हीं महान हो।। सूर्य
ईश महिमा तेरी दया से हे प्रभु, कौन सी शै मिली नहीं।झोली ही मेरी तंग है, तेरे यहाँ कमी नहीं।।
ईश महिमा हे जगदीश्वर हे भगवान! बहुत निराली तेरी शान ।विश्वविधाता ईश महान् ! बहुत निराली तेरी शान।। अमर अनादि
ईश महिमा जरा तो इतना बता दो भगवान।लगन ये कैसी लगा रहे हो।मुझी में रहकर मुझी से मेरी।यह खोज कैसी
ईश महिमा निराकार वह ईश है, हाथ पग न कान।बिन जिह्वा बिन लेखनी, रचा वेद का ज्ञान।। चलता-फिरता है नहीं,
ईश महिमा सच्चा तू करतार है सबका पालन हार है।तेरा सबको आसरा सुखों का भंडार है। नदियाँ नाले पर्वत सारे,