द्वार

खुले रखे द्वार धर्म छोड़ जाने वाले काज

दयानन्द बावनी कवि दुलेराय काराणी शुद्धि खुले रखे द्वार धर्म छोड़ जानेवाले काज।आनेवाले काज दोष दीनो है अशुद्धि को॥ अति मतिमन्द अंध धर्म अधिकारी...
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