श्वासों का क्या भरोसा, रुक जाये कहाँ पर।
श्वासों का क्या भरोसा,
रुक जाये कहाँ पर।
कर जाओ काम ऐसा,
हो शान इस जहाँ पर।।
मत हँस कभी किसी पर,
न सता कभी किसी को -2
न जाने कल को तेरा,
क्या हाल हो यहाँ पर।।
श्वासों का क्या भरोसा, रुक……..
जो हंस जैसा जीवन,
चाहता है बशरता-2 चुन लो
गुणों के मोती,
बिखरे जहाँ-जहाँ पर।
श्वासों का क्या भरोसा, रुक…………
कर कर्म इतना ऊँचा,
जो बुलन्दियों को छूले-2
इज्जत से नाम तेरा,
आ जाये हर जुबां पर।।
श्वासों का क्या भरोसा, रुक………..
सुविचार
यदि किसी की संगति से आपके विचार और व्यवहार शुद्ध होने लग जायें, तो समझ लीजिए कि वह कोई साधारण व्यक्ति नहीं है।










