स्वर्ग नरक है इस धरती पर
स्वर्ग नरक है इस धरती पर,
नहीं गगन के देखो पार।
अच्छा कर्म तो सुख देवे है,
बुरा कर्म है दुःख का सार ।1।
जो दुःख पाता प्रभु से कहता,
क्यों प्रभु दुःख तुम देते हो।
हमने किया नहीं कुछ ऐसा,
फिर क्यों नहीं सुख देते हो।
याद नहीं है उस प्राणी को,
जन्म-जन्म के पाप का भार ।2।
स्वर्ग नरक है इस धरती पर, नहीं गगन……
एक फकीर जो नंगा सोने,
तन ढकने को नहीं बसन।
दुःख सहकर मन निर्मल होगा,
करले करले पीर सहन।
दंड भोग के पाप कटेगा,
कारागार बना संसार ।3।
स्वर्ग नरक है इस धरती पर, नहीं गगन……
सुख-दुःख दोनों एक समान,
दोनों प्रभु के हैं वरदान।
अंधकार तो दिन भी संग में,
यही प्रभु का परिचय ज्ञान।
प्रभु का सुमिरन नारायण कर,
दुःख जो करता संहार ।4।
स्वर्ग नरक है इस धरती पर नहीं गगन…….










