सुरस सुबोधा विश्वमनोज्ञा

0
35

सुरस सुबोधा विश्वमनोज्ञा

सुरस सुबोधा विश्वमनोज्ञा,
ललिता हृद्या रमणीया।
अमृतवाणी संस्कृत भाषा,
नैव क्लिष्टा न च कठिना ।।१।।

कवि-कोकिल वाल्मीकि
विरचिता रामायण रमणीय कथा।
अतीव सरला मधुरमञ्जुला
नैव क्लिष्टा न च कठिना ।।२।।

व्यासविरचिता गणेश लिखिता
महाभारते दिव्यक था।
कौरव-पण्डव-संगरमथिता,
नैव क्लिष्टा न च कठिना ।। ३ ।।

कुरूक्षेत्र-समराङङ्गणगीता,
विश्ववन्दिता भगवद्‌गीता ।
अमृतमधुरा कर्मदीपिका,
नैव क्लिष्टा न च कठिना।।४।।

कवि कुलगुरू नव रसोन्मेषजा
ऋतु-रघु-कुमार कविता।
विक्रम – शाकुन्तल मालविका
नैव क्लिष्टा न च कठिना।।५।।