सूरज निकले पहले उठ के
सूरज निकले पहले उठ के,
हवन-संध्या नित करियो
नहीं तो जीवन नैया डूबेगी,
तुम देखते रहियो ।।
भंवर में नैया डूबेगी तो,
तुम भी डूब जाओगे।
फिर न बचेगा कोई यहां पर,
इन पाप तरंगों से डरियो ।।
जो जैसा कर्म कमायेगा,
वो फल भी वैसा पायेगा।
परोपकार में दिन को बिताना,
वेद पाठ सब नित करियो ।।
प्रातः काल उठ कर ऐ मानव,
गीत प्रभु के गाया कर।
आगे कदम बढ़ाते जाना,
नहीं पापों से झोली भरियो ।।
पितु-मात को जो दुःख देवेगा,
वो नरक धाम को जावेगा।
सफल न होगा जीवन में वह,
सागर तुम सेवा करियो ।।










