सूरज को लाख हैं आदाब !

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सूरज को लाख हैं आदाब !

सूरज को लाख हैं आदाब !
हर इन्सान के लिए,
वह रात बीज से,
दिन अंकुरित करता है।

उम्र का एक टुकडा,
रोज होता है हरा।
इन्सान का हक बड़ा महान,
वह सावनाए, फगुनाए,
या पतझड़ हो जाए ।।