सुनलो समय की पुकार, अब मत धोखे में (धुन तुमको पुकारे मेरा प्यार)
सुनलो समयकी पुकार,
अब मत धोखे में
आना देशवासियों।। टेक ।।
सदियों में आया मौका
हाथों में तुम्हारे फिर
यह आ ना सकेगा।
अब भी न जागे तो फिर
दुनियां में तुमको कोई
जगा न सकेगा।
करदो यह दूर खुमार,
अब मत धोखे में आना ।।1।।
सवेरे का खोया हुआ शाम को
घर लौट आये फिर भी है अच्छा।
ठोकर को खाकर यदि हमेशा को
सम्भल जायें फिर भी है
अच्छा दुश्मन हुआ है संसार,
अब मत धोखे में आना।।2।।
अपने पराये की पहचान करके
अब तुम अपने घर को सम्भालो।
भाई है तुम्हारे जिन्हें समझते हो
न्यारे अपनी छाती से लगालो।
संगठित बनालो परिवार,
अब मत धोखे में आना।।3।।
खड़े हैं विधर्मी आज घात में
तुम्हारी लूटने को लाल ललना।
देश की रक्षा हितार्थ शोभाराम
‘प्रेमी’ अपने पथ से न बिचलना।
कठिन है परिक्षा इस बार,
अब मत धोखे में आन।।4।।










