जयपुर की एक सभा में गुरुजी प्रवचन दे रहे थे। सभा में सैकड़ों लोग ध्यान से सुन रहे थे। तभी उन्होंने 30 वर्षीय रोहित को खड़ा किया और पूछा—
“मान लो, तुम मुंबई में जुहू चौपाटी पर टहल रहे हो और सामने से एक बेहद सुंदर लड़की आ रही है। तुम क्या करोगे?“
रोहित थोड़ा झेंपते हुए मुस्कुराया और बोला— “गुरुजी, नज़र तो जाएगी, उसे देखेंगे।”
सभा में हल्की हंसी गूंज उठी।
गुरुजी ने फिर पूछा— “अगर वह लड़की आगे बढ़ जाए, तो क्या तुम पीछे मुड़कर भी देखोगे?”
रोहित हंसते हुए बोला— “अगर धर्मपत्नी साथ न हो, तो शायद हां!”
पूरी सभा ठहाकों से गूंज उठी।
गुरुजी भी मुस्कुराए और बोले— “अच्छा, यह बताओ कि वह सुंदर चेहरा तुम्हें कितनी देर तक याद रहेगा?”
रोहित थोड़ा सोचकर बोला— “शायद 5-10 मिनट तक, जब तक कोई और सुंदर चेहरा न दिख जाए।”
गुरुजी ने सिर हिलाया और कहा— “अब जरा एक और स्थिति सोचो।”
✨ जीवन का दूसरा दृश्य ✨
“मान लो, तुम जयपुर से मुंबई जा रहे हो। मैंने तुम्हें कुछ किताबों का एक पैकेट दिया और कहा कि इसे मुंबई में हमारे एक परिचित के पास पहुँचा देना।”
रोहित ध्यान से सुनने लगा।
गुरुजी ने आगे कहा—
“तुम जब उस व्यक्ति के घर पहुँचे, तो देखा कि वह एक बहुत बड़ा बंगला है। बाहर कई गाड़ियाँ खड़ी हैं, चौकीदार खड़े हैं। तुमने पैकेट की सूचना अंदर भिजवाई, और वह व्यक्ति खुद बाहर आया। बहुत विनम्रता से तुमसे पैकेट लिया, अंदर चलने का आग्रह किया, आदरपूर्वक बैठाया और खुद अपने हाथों से गरम खाना परोसा।”
“फिर जाते समय जब उसने पूछा कि तुम किससे आए हो और तुमने कहा—’लोकल ट्रेन से’—तो उसने तुरंत अपने ड्राइवर को बुलाया और कहा, ‘इन्हें आराम से इनके स्थान तक पहुँचा देना।’ और जब तुम कार से अपने ठिकाने के पास पहुँचने ही वाले थे, तब तुम्हारे फोन पर उस व्यक्ति का कॉल आया—‘भाईसाहब, आप ठीक से पहुँच गए न?’”
गुरुजी ने रोहित की ओर देखा और पूछा— “अब बताओ, यह व्यक्ति तुम्हें कितने दिनों तक याद रहेगा?”
रोहित ने तुरंत उत्तर दिया— “गुरुजी, मरते दम तक नहीं भूलूँगा!”
सभा में गहरा मौन छा गया।
गुरुजी मुस्कुराए और बोले—
“यही जीवन की सच्चाई है, बालक!”
“सुंदर चेहरा थोड़े समय के लिए आकर्षित करता है, लेकिन सुंदर व्यवहार जीवनभर याद रहता है।”
“चेहरे की सुंदरता क्षणिक होती है, लेकिन अच्छे संस्कार, अच्छा आचरण और विनम्रता हमेशा दिलों में बसे रहते हैं।”
“अगर सच में सुंदर बनना है, तो अपने चेहरे से नहीं, अपने व्यवहार से बनो!”
पूरी सभा तालियों से गूंज उठी। रोहित की आँखें नम थीं, क्योंकि आज उसने जीवन की सबसे बड़ी सीख सीख ली थी।










