सुमिरन कर ले मेरे मना

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सुमिरन कर ले मेरे मना

सुमिरन कर ले
मेरे मना
तेरी बीती जाती उमर
हरी नाम बिना (1)

देह नैन बिना
रैन चन्द्र बिना
मन्दिर दीप बिना
जैसे पण्डित वेद विहीना (2)
तैसे प्राणी हरी नाम बिना (1)
सुमिरन कर ले मेरे मना

काम क्रोध मद लोभ निवारो
छाड़ दे सन्तजना
कहे “नानक शाह”
सुनो भगवन्ता
याचक में नहीं कोई अपना
सुमिरन कर ले मेरे मना
सुमिरन कर ले मेरे मना
मेरे मना
मेरे मना
मेरे मना