सुमेधा जीवन में धार के
सुमेधा जीवन में धार के,
ऋत प्राणों में उतार के।
ऊंचे चढ़ते जाएं,
बन्धु रेऽ मानव रेऽ ।। टेक ।।
तेरे पथ सुख पंछी,
खूब चहचहाएं।
पल-पल दिव्यता
ये आनन्द बरसाएं ।।
अरे ब्रह्म निकट हो जाएं,
मोक्ष गान हम गाएं।
संकल्प पूर्ति आत्म भाएं,
भाव बांसुरि की मधुरिमा में।
झूम झूम हम गाएं,
ऊंचे चढ़ते जाएं ।। १ ।।
वेद जीवन में भर के
सुसमृद्ध हो कर के बढ़ें।
आकाश आकाश नापें
द्यौ तक ऊंचे चढे ।
नेह भरे मुस्काए जग
अपना हो जाए।
प्रेमधारा हम बहाएं
सम-मन समचित होकर के।
हम एक हो जाएं
ऊंचे चढ़ते जाएं ।। २।।










