सुख की वर्षा हो भगवन इस परिवार में। (यज्ञ के पश्चात याज्ञिक परिवार को धन्यवाद)
सुख की वर्षा हो भगवन इस परिवार में।
शिष्टता हो सदा इनके व्यवहार में।। टेक ।।
नित्य कर्म के करने में आलस्य न हो।
रहे उत्साह उंमग हृदय उद्गार में । ।1।।
दो हाथों कमा दान सौ हाथों से
नित्य करते रहें पर उपकार में।।2।।
भूखें नंगों को अन्न वस्त्र देते रहें।
कमी आये ना अन्न धन की भण्डार मे।।3।।
देश प्रेमी रहें स्वस्थ्य धर्मात्मा ।
यश कीर्ति बढ़े इनकी संसार में।।4।।
मर जांऊ मांगू नहीं अपने तन के काज
परोपकार के वास्ते मांगत आवे ना लाज।।5।।










