सुख चाहे जो नर जीवन का

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सुख चाहे जो नर जीवन का

सुख चाहे जो नर जीवन का
जप ले प्रभु-नाम प्रमाद न कर
सुख चाहे जो नर जीवन का

है वो ही सुमरने योग्य सखा
तू और किसी को याद ना कर
सुख चाहे जो नर जीवन का

अस्थिर हैं जग के ठाठ सभी
यदि बिछुड़़ गए अचरज ही क्या
हो लोभ मोह के वशीभूत
सिर धुन के शोक-विषाद न कर
सुख चाहे जो नर जीवन का

धन-माल अपार बटोर भले
पर इतना ध्यान अवश्य रहे
अपना घर-बार बसाने को
औरों का घर बर्बाद न कर

पर-निन्दा को तजकर ‘प्रकाश’
आदर्श बना निज जीवन को
सत्-ज्ञान प्राप्त कर सज्जन से
दुर्जन से व्यर्थ विवाद ना कर
सुख चाहे जो नर जीवन का
जप ले प्रभु-नाम प्रमाद न कर
सुख चाहे जो नर जीवन का
है वो ही सुमरने योग्य सखा
तू और किसी को याद ना कर
सुख चाहे जो नर जीवन का
जप ले प्रभु-नाम प्रमाद न कर
सुख चाहे जो नर जीवन का