सुधी मन मेरे, सुन मेरा कहना

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सुधी मन मेरे, सुन मेरा कहना

सुधी मन मेरे,
सुन मेरा कहना,
जहाँ नहीं अमृत
वहाँ नहीं रहना,


जहाँ भक्ति का,
शुद्ध सरोवर,
गीत प्रभु के वहाँ
गाते ही रहना,
सुधी मन मेरे

जग में दौड़ लगी है, लगा ले,
घर धन रतन बने हैं, बना ले,
चमत्कार ऐसे कई सम्भव ,
सुख तो मिले – आनन्द मिले ना
सुधी मन मेरे

नहरें बिजली बाँध बना ले,
जल थल वायुयान बना ले,
बुद्धि है कौशल नाम बढ़ा ले
आनन्द पुष्प तो फिर भी खेले ना
सुधी मन मेरे

इनसे बढ़कर रत्न है आत्मिक,
श्रवण मनन निदिध्यासन सात्विक
ज्ञान ध्यान समाधान है अमृत,
निश्चित है आनन्द का मिलना,
सुधी मन मेरे

अन्न बल ज्ञान तू सोम ही हो जा
सब दाताओं में श्रेष्ठ तू हो जा
ज्ञानी ध्यानी धर्म की नदियों
प्रभु के आनन्द सिन्धु में ढ़हना


सुधी मन मेरे,
सुन मेरा कहना,
जहाँ नहीं अमृत
वहाँ नहीं रहना,
जहाँ भक्ति का,
शुद्ध सरोवर,
गीत प्रभु के वहाँ
गाते ही रहना,
सुधी मन मेरे