सुध बिसर गई आज तेरे मिलन की
सुध बिसर गई आज,
तेरे मिलन की
दशा जानते हो,
विकल मेरे मन की
सुध बिसर गई आज,
तेरे मिलन की
हम हो गए हैं
पराशीर्ण अब तो
अभिन्न सखा बन के
हे दाता ! बल दो
सुध बिसर गई आज,
तेरे मिलन की
आत्मबल, मनोबल का
सद्गुण-सौंदर्य
नष्ट हो रहा है ये
सत्य-तप का ऐश्वर्य
सुध बिसर गई आज,
तेरे मिलन की
तन का बुढ़ापा
जब होगा तब होगा
मन का बुढ़ापा
जो आया क्या होगा
सुध बिसर गई आज,
तेरे मिलन की
हे अग्ने प्रभुवर !
क्यों आते नहीं तुम
क्या हम सर्वनाश में
हो जाएँगे गुम ?
सुध बिसर गई आज,
तेरे मिलन की
आ जाओ
अभिशस्ति से पहले आओ
कर दो उद्धार
ना व्याकुल बनाओ
सुध बिसर गई आज,
तेरे मिलन की
दशा जानते हो,
विकल मेरे मन की
सुध बिसर गई आज,
तेरे मिलन की










