स्तोत्र बना मन में हर समय

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स्तोत्र बना मन में हर समय

स्तुति-वृत्ति से जागा हृदय
स्तोत्र बना मन में हर समय
देह में अग्नि-प्रताप दिखा
है अग्नेश को प्रिय अतिशय
स्तुति-वृत्ति से जागा हृदय

परम पूज्य मेरे प्रिय अग्नेश !
देह-आत्मा में करो प्रवेश
तुम मुझमें और मैं तुझमें
भीगे नयनों का उन्मेष
नैन छलक पड़ते हैं बरबस
बिलख-बिलख रोता है हृदय
स्तुति-वृत्ति से जागा हृदय
स्तोत्र बना मन में हर समय
स्तुति-वृत्ति से जागा हृदय

अपने प्रकाश झरोखों में
तन-मन भावों को रख लो
छा जाए मीठा आतङ्क
मर्मस्पर्शी पीड़ा भर दो
मल-विक्षेप को देना बहा
प्रेम-मिलन को देना समय
स्तुति-वृत्ति से जागा हृदय

मधुर मिलन की व्याकुलता
लग रही है मुझको मीठी
पीड़ा रुदन व व्याकुलता
है ये याज्ञिक परिमिति
यज्ञिय आँसू रुला के जाओ


रूद्र रूप का दे दो परिचय
स्तुति-वृत्ति से जागा हृदय
स्तोत्र बना मन में हर समय
देह में अग्नि-प्रताप दिखा
है अग्नेश को प्रिय अतिशय
स्तुति-वृत्ति से जागा हृदय