सृष्टि में जीव को तू उत्पन्न कर रहा है

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सृष्टि में जीव को तू उत्पन्न कर रहा है

सृष्टि में जीव को तू
उत्पन्न कर रहा है
उत्पन्न करके उसका
पालन भी कर रहा है

रक्षक तू ही हमारा
हमें प्राणों से भी प्यारा
दुखियों के कष्ट हरता
आनन्द मन में भरता
हम सब का प्राण तू ही
सब में तू रम रहा है
सृष्टि में जीव को तू
उत्पन्न कर रहा है

तेरा तेज महान् छाया
वेदों ने भी ये गाया
सृष्टि की वस्तु वस्तु
में तू ही तो समाया
तेरा ध्यान धरते हैं हम
दिल में तू छुप रहा है
सृष्टि में जीव को तू
उत्पन्न कर रहा है

हम माँगते हैं तुझसे
तेरी दया निराली
कल्याण सब का करता
इस विश्व का तू माली
दे कर प्रकाश मन में
उस पार कर रहा है
सृष्टि में जीव को तू
उत्पन्न कर रहा है

प्रज्ञा का दान दे कर
सन्मार्ग पर चलाओ
उत्तम बन कर्मों से भगवन्
मेरे जीवन को सजाओ
तेरी दया से सारा
सन्सार चल रहा है
सृष्टि में जीव को तू
उत्पन्न कर रहा है

तेरा नाम सब से प्यारा
सबका तू ही सहारा
ऋषियों ने भी विचारा
दुखियों ने भी पुकारा
कर्मवीर बन के जीना
समझा कर कह रहा है
सृष्टि में जीव को तू
उत्पन्न कर रहा है

“मिथलेश” ये विचारे
तू ही दिल में है हमारे
तू ही शक्ति देता है सबको
तू ही मोल में हमारे
तेरा परिचय सारा
ये ब्रह्माण्ड दे रहा है
सृष्टि में जीव को तू
उत्पन्न कर रहा है

सृष्टि में जीव को तू
उत्पन्न कर रहा है
उत्पन्न करके उसका
पालन भी कर रहा है