सृष्टि की आदि से देश सिरमौर था।
सृष्टि की आदि से देश सिरमौर था।
आज भी है और कल भी रहेगा॥टेक॥
ऋषियों की भूमि वीर जननी कहलाती है।
छ छ ऋतुएँ आकर अपना रूप दिखाती हैं।
पवित्र वेदज्ञान का भी यहीं हुआ भोर था।
आज भी है और कल भी रहेगा॥१॥
यहीं हुआ प्रादुर्भाव आत्मीय ज्ञान का।
यहीं हुआ ध्रुव भक्त सच्चा भगवान का।
उपनिषद् गीता का भी यहीं हुआ दौर था।
आज भी है और कल भी रहेगा॥२॥
राम कृष्ण योगी सन्त वीर हनुमान से।
राक्षस संहारे कभी हारे न जहान से।
सुख और शान्ति का राज्य ठौर ठौर था।
आज भी है और कल भी रहेगा॥३॥
मद्यपायी नहीं कोई ना हि मांसाहारी थे।
दूध घी खनेवाले सभी शाकाहारी थे।
नाही कोई दुराचारी नाही कोई चोर था।
आज भी है और कल भी रहेगा॥४॥
राष्ट्रीय भाव भर देश को जगाएँगे।
विश्वगुरु राष्ट्र को हम पुनः बनाएँगे।
भारतसम भूमण्डल में नहीं कोई और था।
आज भी है और कल भी रहेगा॥५।।










