शुभ कर्म ना कमाया, प्रभु नाम भी न गाया।
शुभ कर्म ना कमाया,
प्रभु नाम भी न गाया।
कुछ तो समझ ले प्राणी,
दुनियां में क्यों है आया।।
दुनिया है एक झमेला,
है चंद रोज का मेला।
आया था खाली हाथों,
और जायेगा अकेला।
क्या होगा कल न सोचा,
जीवन है धन पराया।।
शुभ कर्म न कमाया, प्रभु नाम……..
ये जग है भूल भूलैयां,
अब भी समझ ले भैया।
कुछ बन्दगी तू कर ले,
तर जाए तेरी नैया।
पर दर रहा भटकता,
फिर भी समझ न पाया।।
शुभ कर्म न कमाया, प्रभु नाम……..
कोई नहीं है तेरा,
न करना मेरा मेरा।
शुभ कर्म कर ले प्राणी,
छंट जाएगा अंधेरा।
खाया-पिया, तू सोया,
विषयों में मन लगाया।।
शुभ कर्म न कमाया, प्रभु नाम……..










