श्री भगवत वेद कथा का आयोजन, कानड

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श्री भगवत वेद कथा का आयोजन

दिनांक 21 जनवरी से 25 जनवरी 2025

धर्म प्रेमी सज्जनों माताओं बहनों,

बड़े हर्ष के साथ सूचित किया जा रहा है कि कानड़ नगर में संगीतमय भगवत वेद कथा का आयोजन किया जा रहा है। यह पूर्व में दो बार इसी नगर में आयोजित की गई थी। कथा में हजारों श्रद्धालुओं ने जीवन की उन्नति का लाभ प्राप्त किया। अनेक धर्म प्रेमी सज्जनों माताओं के आग्रह पर पुनः यह आयोजन आर्य समाज व जन सहयोग से कार्यक्रम समिति के द्वारा आयोजित किया जा रहा है।

आज धार्मिक आयोजनों में दिखावा व मनोरंजन बढ़ रहा है। बार बार किस्से, कहानी, भजन, संगीत और स्थान की सौन्दयर्ता प्रधान रुप कथा सत्संग में देखे जा रहे हैं। कथा या सत्संग का लाभ तो मानव मात्र को सत्यज्ञान से परिचित करवाता है। जिससे जीवन की सफलता, सुख, शान्ति की प्राप्ती दुःखों से दूर होने के ज्ञान का संदेश मिलता है। यह सब मार्ग हमारे ग्रंथों में विद्वानों, ऋषि मुनियों के सन्देश में उपलब्ध है। जो कथा व सत्संग के द्वारा हमें प्राप्त होता है। मनुष्य जीवन अनमोल है पर जीना बहुत कम व्यक्ति जानते हैं।

मुख्य रूप से इस कथा में वेदों पर जो ईश्वर का ज्ञान है धर्म का मूल है, सनातन है, भगवान श्रीराम एवं भगवान श्री कृष्ण चन्द्र जी की शिक्षा के आधार हैं, उन पर उपदेश सुनने को मिलेगा। इसके अतिरिक्त रामायण, गीता, महाभारत, उपनिषद, दर्शन शास्त्र, स्मृति ग्रंथों की ज्ञान चर्चा भी प्रसंग अनुसार की जावेगी।

कथा की प्रस्तुति पं. प्रकाश जी आर्य महू द्वारा की जावेगी। आप सनातन धर्म की भावना व कार्य हेतु सम्पूर्ण भारत के अतिरिक्त अनेक देशों की यात्रा कर चुकें हैं। स्वयं संगीतकार गायक व अनेक पुस्तकों के लेखक हैं, जिन्होंने अपना पूर्ण समय सनातन धर्म के लिए दिया है।

कथा में मनुष्य जीवन से संबंधित अनेक विषय जैसे अनमोल जीनव का महत्व और सफलता कैसे ? दुःखों से मुक्ती कैसे ? परमात्मा से मिलना कठिन नहीं। सनातन धर्म का मर्म क्या है? समाज, राष्ट्र और हमारा धर्म। जीवन में सुख, शान्ति, समृद्धता के सूत्र । जीवन की धन सम्पत्ती क्या है ? संसार में रहना कैसे ? आदि ज्ञानवर्धक विषयों पर चर्चा होगी। इसके साथ ही मधुर संगीत के साथ ज्ञानवर्धक भजनों की भी प्रस्तुति सुन सकेंगे।

अतः धर्म प्रेमी जनों से अनुरोध है इस पवित्र ज्ञान गंगा में स्नान करने हेतु अवश्य पधारें और जीवन लाभ प्राप्त करें।

कार्यक्रम स्थल :

मांगलिक भवन परिसर, कानड

कथा का समय : दोपहर 1.00 बजे से 4.00 बजे तक

-: विशेष :-

कार्यक्रम में किसी प्रकार का नशा करके न आवे, धूम्रपान न करें और अपने मोबाईल सायलेंट रखें या बन्द रखें ताकि शान्ति पूर्वक कथा का लाभ ले सकें।

राजपुत (बीरागाँव) राधेश्याम शर्मा (हरगन खेड़ी) सिद्ध सिंह, राजपुत कालुसिंह मिलाला (भडभुजी) आर्य (बोर खेड़ी) भगवान सिंह गुर्जर संजय आर्य प्रमोद जीवन सिंह गुर्जर सिंगावत डा. अमृतलाल शर्मा (चाचा खेड़ी) सिसौदिया सरपंच नारायण सिंह चौहान (मेद्या खेड़ी) जनपद सदस्य (परसुला) बद्री सिंह बालु सिंह

आयोजक समिति

संरक्षक – पं. श्री काशीराम आर्य अनल

अध्यक्ष – विजय कुमार अग्रवाल

उपाध्यक्ष – मनोज गुप्ता

सचिव – राजेश डिलर

सह सचिव :- जवान सिंह संगवालिया

कोषाध्यक्ष :- मोहनलाल जी आर्य

महिला समिति

अध्यक्ष :- श्रीमती विजय लक्ष्मी माली

उपाध्यक्ष :- श्रीमती नीलम शर्मा

सचिव :- श्रीमती कविता शर्मा

सह सचिव- कु. भावना परमार

सदस्यगणः-

  • श्रीमती मांगु बाई आर्य, श्रीमती तरूलता राठौर, श्रीमती मधुबाला परिहार, श्रीमती मंजु राठौर श्रीमती अल्का आर्य कु., दीपीका आर्य श्रीमती दीपीका सौलंकी

वैद कथा आयोजक समिति एवं आर्य समाज व समस्त नगरवासी कानड़ जिला आगर मालवा

निवेदक

  • केशव सिंह दरबार घनश्याम मंगल, दुर्गाप्रसाद पालीवाल, (कड़ीया वाले) बाबुलाल बीजापारी, हरिनारायण राठौर, कैलाशनारायण परिहार, दिनेश जी बीजापारी (अंकल) दरबार सिंह आर्य रमेश खजूरिया, विरेन्द्र सिंह ठाकुर, सिद्धनाथ चौधरी (बोस) अमृतलाल शर्मा • कन्हैयालाल परमार जोरावर सिंह बीजापारी अखिलेश वर्मा सतीश राठौर महेश भार्मा (गुरुजी) डा. देवनारायण गौड़ राजेश उपाध्याय सुरेश बरेठा • कमलेश जैन • गणेश गोयण मोहित राठौर लखन गोड़ दुर्गाप्रसाद सौलंकी ईश्वर सिंह बगड़ावत रमेश आर्य (पोस्ट मास्टर) प्रशांत राठौर दिनेश बैरागी नरेन्द्र आर्य मनोज आर्य संतोश शर्मा देवी सिंह आर्य • ओम शर्मा मानसिंह तंवर जीवन आर्य सुरेश चौधरी नरेन्द्र गौड़ प्रमोद त्रिवेदी शिवनारायण परमार राजेश वर्मा कालु सिंह बीजापारी मनीष मोदी सरदार सिंह (राजा खेड़ी) पुरषोत्तम पाटीदार मनोहर पाटीदार (पचलाना) रोड़ सिंह आर्य • पुर सिंह आर्य (भड़का) आनंद सिंह राजपुत • आत्माराम मालवीय (चौमा) आर्य (बुरलाय) अर्जुन सिंह बगड़ावत रघुवीर सिंह भगत दुले सिंह (चॉदनगांव) • राधेश्याम आर्य (शिवगढ़) भंवरलाल आर्य मुरलीधर सोलंकी प्रेम सिंह