श्रावणी का पर्व अति प्राचीन वैदिक पर्व है।

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श्रावणी का पर्व अति प्राचीन वैदिक पर्व है।

श्रावणी का पर्व अति
प्राचीन वैदिक पर्व है।
हम मनाते हैं इसे प्रति
वर्ष हमको गर्व है।।

वेद से सम्बन्ध है,
इस पर्व का संसार में।
वेद प्रभु का ज्ञान है,
फैला जगत् विस्तार में।।

पतित-पावन मोक्षदायक,
अमर यह सज्ञान है।
वेद के आचरण से,
कल्याण ही कल्याण है।।

वेद के उपदेश की,
ऐसी सरस धारा बहे।
हर हृदय सुख-शान्ति का,
इक स्रोत बन बहता रहे।।

भक्त मुनि, योगी, तपस्वी,
सन्त जन भी कह गये।
सब के सब इसकी सुखद
रस वाहिनी में बह गये ।।

कर गये महिमा का
वर्णन सकल वैदिक ग्रन्थ।
मुग्ध हो कर रह गये इस
पर सभी मत-पन्थ भी ।।

श्रावणी का पर्व लाया
है बड़ा सुन्दर विषय ।
वेदों के स्वाध्याय का
संकल्प लेने का समय ।।

संग हो विद्वत् जनों
का धर्म की चर्चा चले।
पथिक आर्य समाज की
बगिया सदा फूले-फले ।।