शोभा यात्रा के गीत

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शोभा यात्रा के गीत,
दयानंद की ये पताका

दयानंद की ये पताका रंगीली,
सजी ओ३म् के नाम वाली सजीली।
कला चन्द्र की यह जिधर को बढ़ेगी,
निशा पाप की उस दिशा से उड़ेगी।।
खिलेगी प्रभा पुण्य की फिर फबीली
दयानन्द…

सभी के भले की करो कामनाएं,
भरो विश्व कल्याण की भावनाएं।
यही रागिनी यह सुनाती सरीली –
दयानन्द की ये पताका रंगीली।।

जहाँ पेड़ अन्याय का जन्म लेगा,
विषैले कटीले फलों से सजेगा।
वहाँ पर कुल्हाड़ी बनेगी नुकीली,
दयानन्द की ये पताका रंगीली।

सुनो रंग इस का बिगड़ने न देंगें,
इसे रक्त से वीर लाखों रंगेगें।
प्रथा यह पुरानी चलेगी सरीली।
दयानन्द की ये पताका रंगीली ।।

करेंगे प्रभु की सदा वन्दनाएं,
सहेंगे धर्म के लिए यातनाएं।
बढ़ेंगे कभी चाल होगी न ढीली,
दयानन्द की ये पताका रंगीली ।।