शिवाजी पर हो गया माता को विश्वास

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शिवाजी पर हो गया माता को विश्वास

शिवाजी पर हो गया माता को विश्वास,
शिक्षा पाने छोड़ दिया गुरु रामदास के पास,
राजनीति और रण विद्या में
शिवाजी होशियार हुआ,
यवन सत्ता का नाश करने को,
महाबली तैयार हुआ।

पूना में शिवाजी गर्जता था
तो दिल्ली का तख्त हिलता था,
औरंगजेब कांपता था
जब पत्र शिवा का मिलता था।

शठेशाठयम् समाचरेत्,
व्यवहार निपुण था शिवाजी,
वैदिक धर्म का रक्षक,
देशभक्त सगुण था शिवाजी।।