शीत शिशिर हेमन्त का हुआ परम प्राधान्य ।

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शीत शिशिर हेमन्त का हुआ परम प्राधान्य ।

शीत शिशिर हेमन्त का,
हुआ परम प्राधान्य ।
तैल, तूल, तपन का,
सब जग में है मान्य ॥

रुचिरा

उत्तर अयन इसी तिथि को है,
सविता का सुप्रवेश हुआ।
मान दिवस का इस ही कारण,
अब से है सविशेष हुआ।
वेदप्रदर्शित देवयान का,
जगती में विस्तार हुआ।
उत्सव संक्रान्ति, मकर की का,
जनता में सुप्रसार हुआ ॥ १ ॥

तिल के मोदक, खिचड़ी,
कम्बल, आज दान में देते हैं।
दीनों का दुःख दूर भगाकर,
उनकी आशिष लेते हैं।
सतिल सुगन्धित सुसाकल्य से
होम यज्ञ भी करते हैं।
हिम से आवृत नभमण्डल को
शुद्ध वायु से भरते हैं ॥ २ ॥