शान्ति कीजिये प्रभू मेरे मन में।

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शान्ति कीजिये प्रभू मेरे मन में।

ओं द्यौ: शान्तिरन्तरिक्षं शान्तिः पृथिवी शान्तिरापः
शान्तिरोषधयः शान्तिः ।
वनस्पतयः शान्तिर्विश्वे देवाः
शान्तिर्ब्रह्म
शान्तिः सर्वशान्तिः शान्तिरेव शान्तिः सा
मा शान्तिरेधि। ओं शान्तिः शान्तिः शान्तिः ।

शान्ति कीजिये प्रभू मेरे मन में।
जन-जन में जन-जन जीवन में।।
शान्ति युक्त द्यौ वनस्पति जल हैं,
अन्तरिक्ष औषध भूतल हैं।
दिव्य पदार्थ शान्ति स्थल हैं,
स्वयम् शान्ति शान्त अपन में।
शान्ति कीजिये प्रभू मेरे मन में।।1।।

वेद की विद्या श्रुति सुक्त हैं,
सर्वम् शान्ति शान्ति युक्त हैं।
जिससे ये सब विध्न मुक्त हैं,
वही शान्ति चाहूँ भगवन मैं।
शान्ति कीजिये प्रभू मेरे मन में। ।2।।

तीनों तापों से छुटकारा,
कर दो हर दो कष्ट हमारा।
‘प्रेमी तेरा एक सहारा,
चाहता हूँ हर पल हर क्षण में।
शान्ति कीजिये प्रभू मेरे मन में।।