शाम कुछ और है

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शाम कुछ और है (तर्ज-जाने क्यों लोग मोहब्बत किया करते हैं)

शाम कुछ और है,
सुबह कुछ और हैं,
बात आश्चर्य की,
जाने वह लोग कैसे
दिल दिमाग रखते हैं,
तन से उजले हैं, मगर
दिल पै दाग रखते हैं। टेक।


लाखों करें गलती,
मगर कुछ खेद ना होता।
धोने से जल में कोयला,
कभी सफेद ना होता ।।
तन तो है मानव का,
दिल दैत्य दानव का।
फूलों की टोकरी में
काले नाग रखते हैं।।1।।

थन पर लगी हुई जोक
सदा खून पीती है।
धिक्कार उन लोगों को
जिनकी ऐसी नीति है।।


जल मे भी प्यास है
आनन्द में त्रास है।।
ऐसी बुरी तकदीर वह
निर्भाग रखते हैं।।2।।

खुद कांच के घर में जो
पत्थर मारे औरों को।
परिणाम का नहीं भय
वचन मन कर्म के चोरों को।
बारूदी ढेर पर
लगाये हुए बिस्तर ।
अफसोस ‘प्रेमी’ पास में
वह आग रखते हैं।।3।।