सौंधी सौंधी खुशबू आती

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सौंधी सौंधी खुशबू आती

सौंधी सौंधी खुशबू आती,
मोहक फूल महकते हैं;
नया साल आ गया हमारा,
कह कह पंछी चहकते है।

गीत खुशी गाओ सारे,
मिल नववर्ष मनाओ।
नई नई कौपलें फूटती,
मन आकर्षित करती है।

पीली चादर सरसो की
सबके चितवन को हरती है।
आमों के पेड़ो पर कच्चे
पक्के आम लटकते है।
नया साल आ गया हमारा,
कह कह पंछी चहकते है।

गेंहू आलू चना मटर की
फसल तैयार हो जाती है,
तितली बाग बगीचों में ,
भंवरो के संग मंडराती है।
खिल उठता यौवन धरती का,
कण कण खूब चमकते हैं।

नया साल आ गया हमारा,
कह कह पंछी चहकते है।
नई रोशनी नई उमंगे ,
खुशियाँ नई छा जाती है।

हंसती दिखती सभी दिशाएं,
सबको बड़ा लुभाती है।
मस्त पवन के झोंको से ये,
तन मन बड़े मचलते हैं।
नया साल आ गया हमारा,
कह कह पंछी चहकते है।

हरियाली कितनी सुंदर ‘हित’,
क्योंकर पतझड़ भाता है,
सृष्टि नियम अनुकूल ये संस्कृति,
चैत्र मास समझाता है।
भूल के अपने नव संवत को,
पश्चिम में क्यों बहकते हैं।

नया साल आ गया हमारा,
कह कह पंछी चहकते है।
गीत खुशी गाओ सारे,
मिल नववर्ष मनाओ।