सत्यार्थ प्रकाश ऋषि की, इक अनमोल निशानी है।

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सत्यार्थ प्रकाश ऋषि की, इक अनमोल निशानी है।

सत्यार्थ प्रकाश ऋषि की,
इक अनमोल निशानी है।
सब धर्मों की छानबीन कर,
लिखा ग्रंथ लासानी है।
सत्यार्थ प्रकाश ऋषि की,
इक अनमोल निशानी है।
सत्यार्थ प्रकाश ऋषि की, इक……

लिखा गया है यह ग्रंथ,
यह सजा समूल चौदह समुल्लासों में
सभी धर्मों का सार दिया है,
सत्यार्थ प्रकाश में।
किया दूध का दूध है जिसमें,
और पानी का पानी है।
सत्यार्थ प्रकाश ऋषि की, इक…..

सर्व मर्तों के ग्रंथ खोजकर,
सच्ची बात है बतलाई।
टीका-टिप्पणी उन पर करके,
खोल के रख दी सच्चाई।
ब्रह्मचारी की तर्क शक्ति,
सब विद्वानों ने मानी है।
सत्यार्थ प्रकाश ऋषि की, इक……

ऋषि ने इसके लिखने का,
उद्देश्य है पहले समझाया।
सत्यासत्य का निर्णय करना,
परमधर्म है बतलाया।
इसके हर एक शब्द में देखो,
कैसी साफ बयानी है।
सत्यार्थ प्रकाश ऋषि की, इक….. ।।4।।

दिया प्रभु ने आदि सृष्टि में,
मानव को जो ज्ञान है।
उसी वेद का मण्डन इसमें,
किया गया गुणगान है।
जिसको पढ़कर हर जिज्ञासु,
बनता पंडित, ज्ञानी।
सत्यार्थ प्रकाश ऋषि की, इक…..।।5।।

उत्तम नाम है ओ३म् प्रभु का,
वेद ईश्वरीय ज्ञान है।
वेद पढ़ने का अधिकारी,
विश्व में हर इंसान है।
दयानन्द ने सिद्ध किया,
यह परमेश्वर की वाणी है।
सत्यार्थ प्रकाश ऋषि की, इक…….।।6।।

ईश उपासना, सन्ध्या वंदन,
इसमें हमें सिखाया है।
जन्म-मरण से रहित ब्रह्म को,
निराकार बतलाया है।
कबरें, मढ़ी, मसान जो पूजे,
जड़-बुद्धि अज्ञानी है।
सत्यार्थ प्रकाश ऋषि की, इक………।।7।।

मदिरा, मांस, नशों का सेवन,
इसमें निंदित बतलाया है।
क्या खायें हम, भक्ष्याभक्ष्य को,
निर्णय करके समझाया है।
ब्रह्मचर्य, गृहस्थ की महिमा,
इसमें खूब बखानी है।
सत्यार्थ प्रकाश ऋषि की, इक……।।8।।

जन्म से कोई नहीं ब्राह्मण,
ऊँच-नीच इंसान है।
वर्ण का निर्णय करने वाला,
कर्म-धर्म बलवान् है।
छुआछूत जो करे किसी से,
स्वयं नीच अभिमानी है।
सत्यार्थ प्रकाश ऋषि की इक……. ।।9।।

मानव चोला मिला हमें यह,
उत्तम कर्म कमाने को।
जन्म अमोलक नहीं यह पाया,
खाने और मर जाने को।
सब जीवों में तभी कहाता,
सर्वश्रेष्ठ यह प्राणी है।
सत्यार्थ प्रकाश ऋषि की, इक….. ।।10।।

नारी-शिक्षा, गोरक्षा,
में छुपा हुआ एक मर्म है।
स्वतन्त्रता पर मर मिटना,
हर देशभक्त का धर्म है।
आज देश के सब लोगों ने,
बात ऋषि की मानी है।
सत्यार्थ प्रकाश ऋषि की, इक……।।11।।

फिर शुद्धि की रीति चलाकर,
लाखों का उद्धार किया।
पतित हुए बिछुड़े भाइयों पर,
खोल वेद का द्वार दिया।
लेखराम और श्रद्धानन्द ने,
दी इस पर बलिदानी है।
सत्यार्थ प्रकाश ऋषि की, इक….. ।।12।।

पाप-दुर्ग की नींव हिला दी,
खण्डन की तलवार से।
जगा सकल संसार दिया है,
सत्यार्थ की शिक्षा से।
हूर, फरिश्ते, भूत-प्रेत का,
किस्सा खत्म कहानी है।
सत्यार्थ प्रकाश ऋषि की, इक….. ।।13।।

पाखण्डों का इसके आगे,
टिकना बहुत मुहाल है।
आर्य जाति पर करे आक्रमण,
किसकी आज मजाल है।
सुप्त हिन्दू को होश में,
लाने वाला यह सेनानी है।
सत्यार्थ प्रकाश ऋषि की, इक…….।।14।।