सत्ता तुम्हारी भगवन जग में समा रही है
सत्ता तुम्हारी भगवन्
जग में समा रही है
तेरी दया सुगंधी
हर गुल से आ रही है
सृष्टि रचाने वाले
दु:ख से बचाने वाले
दीनों को दो सहारा
मालिक है तू हमारा
तेरे ही ज्योति से चमके
नभ में चाँद सितारे
नील गगन में,
घन गर्जन में
देखे बड़े नजारे
बिगड़ी बनाने वाले
दु:ख से बचाने वाले
दीनों को दो सहारा
मालिक है तू हमारा
चारों ओर जो दीख रही है
यह तेरी फुलवारी
रङ्ग बिरङ्गे फूल खिले हैं
खुश्बु न्यारी-न्यारी
कलियाँ खिलाने वाले
दु:ख से बचाने वाले
दीनों को दो सहारा
मालिक है तू हमारा
धरती का मुख भरा फूलों से
और सागर में मोती
घन गर्जन से पानी बरसे
ये हैरानी होती
अमृत पिलाने वाले
दु:ख से बचाने वाले
दीनों को दो सहारा
मालिक है तू हमारा
निराकार निर्पेल नियन्ता
तू घट-घट का वासी
“लक्ष्मणसिंह बेमोल” कहे
तू सुखदाता सुखराशि
बिछुड़े मिलाने वाले
दु:ख से बचाने वाले
दीनों को दो सहारा
मालिक है तू हमारा
सृष्टि रचाने वाले
दु:ख से बचाने वाले
दीनों को दो सहारा
मालिक है तू हमारा










