सत्सङ्ग वो गङ्गा है, इसमें जो नहाते हैं
सत्सङ्ग वो गङ्गा है
इसमें जो नहाते हैं
पापी से पापी भी
पावन हो जाते हैं
ऋषियों ने मुनियों ने
इसकी महिमा गाई
सङ्गत से जीवन है
ये बात है समझाई
ये वेद बताते हैं
ये ग्रन्थ बताते हैं
वचनों के मोती है
सङ्गत के सागर में
फल ही फल मिलते हैं
सुख के इस तरुवर में
इस ज्ञान सरोवर में
डुबकियाँ लगाते हैं
इस तीरथ से बढ़कर
कोई तीरथ धाम नहीं
दु:ख क्लेश का सन्तों
यहाँ कोई काम नहीं
आते हैं जगत् जो भी
जीवन को सजाते हैं
सत्सङ्ग वो गङ्गा है
इसमें जो नहाते हैं
पापी से पापी भी
पावन हो जाते हैं










