सत्संग से सब प्रेम बढ़ाओ

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सत्संग से सब प्रेम बढ़ाओ,
समय न अपना व्यर्थ गंवाओ।
‘देश’ पिटै ना ताली
महिमा सत्संग की…….

सत्संग अन्दर मोती हीरे,
मिलते लेकिन धीरे-धीरे।
जिसने खोज निकाली,
महिमा सत्संग की……।

सत्संग सच्चा तीर्थ भाई,
करते जिनकी नेक कमाई।
कर्महीन रहे खाली,
महिमा सत्संग की

सत्संग ही सब संकट टारे,
डूबे हुए को सत्संग तारे।
दिन-दिन हो खुशहाली,
महिमा सत्संग की……..