सात बजे जिस वक्त सवेरे जब मैं फांसी पाऊँगा।

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सात बजे जिस वक्त सवेरे जब मैं फांसी पाऊँगा।

सात बजे जिस वक्त सवेरे
जब मैं फांसी पाऊँगा।
फांसी पर चढ़ने से पहले
सन्ध्या-हवन रचाऊँगा ॥ टेक ॥

घृत सामग्री मिली बिस्मिल को
सन्ध्या-हवन रचाया गया।
वन्दे मातरम् का गाना फांसी
से पहले गाया गया।
सात बजे ठीक सवेरे फांसी
पर लटकाया गया।
मरकर जिन्दा रहने का
यह सबको पाठ पढ़ाया गया।
कहे ‘भीष्म’ सुनने वालों को
मैं ज्यादा नहीं रुलाऊँगा ॥

आप होंगे सैकड़ों शस्त्रबन्ध
मेरी जान अकेली है।
जिसको तुमने मृत्यु समझा
वह तो मेरी सहेली है।
जेलें काटी और भूखा मरा
मैंने सकल तबाही झेली है।
अन्तिम हथियार था फांसी का
वो भी बला सर ले ली है।
फांसी का मुझे डर नहीं ले
जन्म दुबारा आऊँगा।

ब्रिटिश साम्राज्य के अन्दर
हवन मन्त्र की बोली हो।
घृत सामग्री की आहुति एक-
एक पिस्तौल की गोली हो।
आजादी के जंग में लड़े
जो नौजवानों की टोली हो।
गोली से जो खून बहेगा
वो होली में रंगरोली हो।
इस होली को तुम ही
देखना में तो चला ही जाऊँगा।

कुर्बानी खाली नहीं जाती
ये भी आपको याद रहे।
भारत का बच्चा-बच्चा
बन बिस्मिल रामप्रसाद रहे।
जब तक गोरे रहें हिन्द में
लड़ने का सिंहनाद रहे।
इन गोरों की हुकूमत को
करके हम बर्बाद रहे।
भारत के कोने-कोने में
क्रान्ति की आग लगाऊँगा।