सरल है बहुत नाम जपना प्रभु का
सरल है बहुत नाम
जपना प्रभु का
मगर उसको दिल में
बिठाना कठिन है
जुबां से तो कहते है
सब कुछ वही है
मगर उसको अपना
बनाना कठिन है।।
हमारे हृदय रूपी
घर में वही है,
चमन में वही
शहर में वही है।
वह नयनों की ज्योति
में भी रम रहा है.
बिना योग साधन के
पाना कठिन है।।
बहुत से पुजारी
नमाजी भी देखे,
कई वेद पाठी व
काजी भी देखे।
सभी अपनी अपनी
हवा बांधते है,
किसी के मगर काम
आना कठिन है।।
नगर में रहे चाहे
बनवास में हो,
उदासी बने चाहे
सन्यास में हो।
कर्मवीर हो चाहे
रणधीर भी हो.
मगर मोह को दिल से
हटाना कठिन है।।
सदा अपने गुणगाण
करना सरल है,
किसी को परेशान
करना सरल है,
हृदय में अमी रस
बहा देने वाला
मधुर गीत गाकर
सुनाना कठिन है।।
यूं ही बीत जायेगी
जीवन की घड़ियां
सभी टूट जायेगीं
स्वासों की लड़िया।
ये मानव का तुझको
जन्म जो मिला है.
बिना भाग्य इसको
पौना कठिन है।।
गुरू भी है देखे है
चेले भी देखे
मठो में लगे बहुत
मेले भी देखे।
दयानन्दं जैसा
गुरुभक्त बनकर,
गुरू के वचन को
निभाना कठिन है।।










