सर देंगे भेंट वतन को

0
11

सर देंगे भेंट वतन को

सर देंगे भेंट वतन को,
सर देंगे भेंट वतन को।
भेंट चढ़ाने के लिये सर की
आज खुशी से हम निकले।
एक है इच्छा मन में वतन के
लिये आखरी दम निकले।
मौत से क्या घबरायेंगे निकले
सर बांध कफन को ॥1॥

अय प्यारे हमवतन चले
मिटने को तेरी आन पर।
फर्ज है ये अहसान नहीं
चले खेल खेलने जान पर॥
आज देश के रंग में रंगकर
चल दिये अपने मन को ॥2॥

हो कोई शुभ कर्म हमारा
जन्म जो अबकी बार मिले।
और नहीं चाहते हैं कुछ
ए वतन हमें तेरा प्यार मिले।
देख ना पाये आँखों से
आजादी की दुल्हन को ॥3॥

छोड़ चले कुछ आप के
ऊपर काम वतन का साथियों।
रुक न सके कर्मठ तब तक
प्रोग्राम वतन का साथियों।
तोड़ ना दो जब तक इस
भारत माता के बंधन को ॥4॥

राधे०-तीनों गले मिले थे
आज उमंग का रंग चढ़ा।
तोला गया भगत फांसी
पर पूरा वजन ढाई पौण्ड बढ़ा ॥
लगा दी फांसी तीनों को
सतलज पै जलाया लाशों को।
आज खोलकर कौन पढ़े
कर्मठ इनके इतिहासों को॥

शेर-शहीदों की चिताओं
पर लगेंगे हर वर्ष मेले।
वतन पर मिटने वालों का
यही नामों निशा होगा।
फिर जहाँ में जन्म लेंगे
हम गरीबाने वतन ।
हम बनेंगे बागवां अपना
तू ही होगा चमन॥