बेड़ा पार न होगा
(तर्ज-इस रेशमी पाजेब की झंकार के सदके)
संसार में जिसका प्रभु से प्यार न होगा।
उसका तो भव सागर से बेड़ा पार न होगा।
संसार में जिसका…..
१. सुबह और शाम जो उसके खुले दर पर न जाएगा।
न मन में प्रेम लाएगा न मस्तक ही झुकाएगा।
ईश्वर के वरदानों का वो हकदार न होगा।
संसार में जिसका…..
२. प्रभु तो हर समय ख़ुशियाँ ज़माने पर लुटाता है।
मगर जो जाग जाता है वही तो लूट पाता है।
सोए का तो सपने में भी उद्धार न होगा।
संसार में जिसका…..
३. प्रभु हर एक प्राणी को सदा देता ही देता है।
वो अपने दान के बदले कभी कुछ भी न लेता है।
दुनियाँ भर में ऐसा कहीं दरबार न होगा।
संसार में जिसका…..
४. वो दुनियाँ से निराला है ‘पथिक’ तू जान ले इतना ।
वो शक्ति सबसे ऊँची है अगर तू मान ले इतना।
तुझको उसकी भक्ति से फिर इनकार न होगा।
संसार में जिसका…..










