संध्या सार:

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🙏ओ३म् 🙏

1️⃣ ओ३म्

हे परमानन्द भगवन्! मैं आप की शरण में आया हूँ। मेरे सब चिंता 🤯, भय 😨, शोक 😢, बंधन ⛓️, दुःख 😞 आदि दूर कर मुझे आनन्द 😊 प्रदान कर दीजिए।

2️⃣ ओ३म्

हे परम प्रभो! मैं आपके सामने प्रतिज्ञा 🤞 करता हूँ कि मैं अपनी वाणी 🗣️, नाक 👃, आँख 👀, कान 👂 आदि सभी इन्द्रियों से पवित्र कर्म ✅ किया करूँगा, अपवित्र नहीं ❌।

3️⃣ओ३म्

हे प्राणप्रिय प्रभो! आप मेरे प्राण 💨, जीवन के आधार 🌱 हैं। मैं साधक 🧘‍♂️ नित्य प्रति प्राणायाम करके अपनी इन्द्रियों को वश में रखूँगा।

4️⃣ ओ३म्

हे पापनाशक ओ३म्! आप वेद 📜, शास्त्र 📖, चेतन 🧠 और जड़ जगत 🌎 को तथा सूर्य ☀️, चन्द्रमा 🌙, दिन 🌞, रात 🌜 को रचकर कण-कण में व्यापक मेरे अन्तर्यामी 👁️ हैं। पाप कर्म ❌ से रोकने के लिए आप मुझे प्रेरित 🙌 करते ही रहते हैं। मैं आपका भक्त 🛐 पाप कर्म से दूर 🚫 रहूँ, ऐसी मुझे शक्ति प्रदान कीजिए 💪।

5️⃣ ओ३म्

हे सर्वव्यापक भगवन्! आप मेरे आगे, पीछे, दाएँ, बाएँ, ऊपर, नीचे, अंदर, बाहर सर्वत्र विराजमान हैं। वृक्ष 🌳, वनस्पति 🍀, सूर्य ☀️, अन्न 🌾 तथा विद्वान् 👨‍🏫 आदि सदा मेरी रक्षा करें 🛡️। मैं किसी से वैर-विरोध न करूँ 🤝 तथा न ही कोई मुझसे वैर-विरोध करे 🚫, क्योंकि आप न्यायकारी ⚖️ हैं।

6️⃣ ओ३म्

हे मेरे अंग-संग रहनेवाले परमेश्वर! आप अनादि काल से अनन्त काल तक 🔄 मेरे रक्षक 🛡️ एवं मित्र 🤝 हैं। आप अज्ञान अन्धकार से 🌑 पृथक करके मुझे मोक्षानन्द प्रदान करें 🕉️।

7️⃣ओ३म्

हे मित्र, वरुण, अग्नि, परमेश्वर! आप जड़ जगत 🌍 अर्थात् द्युलोक 🌌, अन्तरिक्ष लोक 🌠 और पृथ्वी लोक 🌏 के प्रकाशक हो और चेतन आत्माओं के जीवनदाता हो।

8️⃣ ओ३म्

मैं आपका आज्ञाकारी शिष्य हूँ 🙇‍♂️, कृपया मुझे उत्तम कर्म करने का आशीर्वाद दें ✨ कि मैं आपकी सृष्टि में उत्तम कर्म करता हुआ सौ वर्ष तक देखूँ 👀, वेद ज्ञान को सुनूँ 🎧 और सुनाऊँ 📢। इतना ही नहीं, सौ वर्षों से अधिक काल तक जीऊँ 🏋️‍♂️ तथा कभी दीन और किसी का आधीन न बनूँ 🚀।

9️⃣ ओ३म्

हे दया के सागर प्रभो! आप मुझे जप 📿, उपासना 🛐, आदि कर्मों को करते हुए शीघ्र ही धर्म 🕉️, अर्थ 💰, काम 💖 और मोक्ष 🌿 के ३१ नील, १० खरब, ४० अरब वर्षों का आनन्द प्रदान करें।

🔟ओ३म्

ईश्वर कहता है – हे प्यारे जीव 💖! उठ ! धर्म 🕉️, अर्थ 💰, काम 💖 और मोक्ष 🌿 के लिए पुरुषार्थ करो 💪। मैं तुम्हें सब कुछ देने को तैयार हूँ 🎁, लेकिन तुम मेरी ओर देखते नहीं 👀 और पुरुषार्थ नहीं करते ❌।

1️⃣1️⃣ओ३म्

हे दया के भण्डार, करुणामय भगवन्! मैं आपका कोटिशः धन्यवाद करता हूँ 🙏। मेरा नमस्कार स्वीकार करें 🙇‍♂️, मेरा नमस्कार स्वीकार करें 🙇, करें 🙇, और भवसागर से बेड़ा पार करें 🚢।

ओ३म् शान्तिः शान्तिः शान्तिः 🕉️✨


📌 प्रकाशक:

🟢 दर्शन योग महाविद्यालय 🏛️


(वैदिक दर्शन अध्यापन एवं योग प्रशिक्षण का आदर्श संस्थान 🧘‍♂️)
📍 आर्य वन, रोजड़, पो. सागपुर, जि. साबरकांठा (गुजरात)। ३८३ ३०७

📧 E-mail: darshanyog@icenet.net


यह इमोजी के साथ संध्या सार प्रस्तुत किया गया है ताकि यह अधिक प्रभावी, रोचक और भावनात्मक रूप से प्रेरणादायक लगे।
क्या आपको यह स्वरूप पसंद आया? 😊

🙏ओ३म् जी🙏