सम्पत्ति की तलास में हम

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सम्पत्ति की तलास में हम

सम्पत्ति की तलास में हम,
दुःखों के कितने पास जा रहें,
सोचकर हम घबरागये,
कर रहे कितनी पाप कर रहें ।
आ-आ-आ…।

अन्तरा – हम जो करते हैं कर्म कितनी,
उनकी कोई भी गिनती नहीं,
हम ने सारी उमर जो किया,
उसका भी कोई हासिल नहीं-२
हर खुशी की तलास में हम,
पापों के कित ने पास जा रहें,
सोचकर हम घवरागये,
कर रहें कितनी पाप कर रहें ।।१।।

सोचो हम कितने अनजान हैं,
जो ना करना था वो कर रहें
पीछे मुड़के तो देखो जरा,
अपने जीवन में क्या कर रहें,-२
खुद के बारे में सोचे तो हम,
कर रहें तो हम क्या कर रहें
सोच कर हम घबरागये,
कर रहेंकितने पाप कर रहें ।।२।।

जो भी करना है तो सोच कर,
करने की कामयाबी बने बुरे
कर्मों सारे त्यज कर,
शुभ कर्मों में मन लगाएं-२
सुख पाना है तो इस जीवन में,
प्रभु को नित्य हम ध्यान करें
सोच कर हम घबरागये…
कर रहे कितने पाप कर रहें
सम्पत्ति की तलास में हम… ।।३।।