समिधा है समिधान अन्नरूप घृत है अग्नि में आधान
समिधा है समिधान अन्नरूप
घृत है अग्नि में आधान
पर्यावरण की शुद्धि से ही
करता अग्नि कर्म निष्काम
नाना विध उपकार ही है
अग्नि देव का विरुद वरदान
समिधा है समिधान अन्नरूप
ऐसे वरणीय अग्निस्वरूप
ईश्वर तो हैं सुखकर्ता
आत्मा समिधा रूप ईंधन
अग्नि स्वरूप ईश्वर को वरता,
स्तुत्य भाव हैं आत्मा के
ईशाग्नि में घृत समान
समिधा है समिधान अन्नरूप
घोर तप बल अति पुरुषार्थ से
पूर्ण सम्पन्न हैं परमेश्वर
ज्ञान ज्योति के स्रोत अनुपम
आश्चर्यों से बढ़कर ईश्वर
भक्त तो जिज्ञासु बन के
उपासना में करते ध्यान
समिधा है समिधान अन्नरूप
जगत के महायज्ञ कर्ता
देते हैं भक्तों को सुख
भक्त भी होके समर्पित
रहते ईश्वर के सम्मुख
होते हैं बहुविध प्रकाशित
पाते हैं आनन्द धाम
समिधा है समिधान अन्नरूप
घृत है अग्नि में आधान
पर्यावरण की शुद्धि से ही
करता अग्नि कर्म निष्काम
समिधा है समिधान अन्नरूप










