संभल-संभल के चल रे बन्दे
तर्ज – देख तेरे संसार की हालत…….
संभल-संभल के चल रे बन्दे,
राह में बिछे हैं शूल।
उड़ रही आगे पीछे धूल,
उड़ रही आगे पीछे धूल॥
पथिक है तू पग सीधे धर ले,
जगदीश्वर से प्यार तू कर ले बाधा
ना कोई आयेगी, शुभ कर्मों से
अरे संवर ले जीवन हो ये ‘सचिन’ सुहाना,
वेदों के अनुकूल उड़ रही
आगे पीछे धूल……
सफर है लम्बा दूर है जाना,
चलते रहना मत घबराना आ जायेगी
मंज़िल तेरी, हो जायेंगे
कष्ट रवाना धोखे से भी
फिसल ना जाना,
मत करना ये भूल उड़ रही
आगे पीछे धूल………..
जिसने ये संसार रचाया,
उसी प्रभु से ये तन पाया
दुनियाँ के ये सभी नज़ारे,
छुपी सभी में उसकी माया
शाम सवेरे प्रभु भक्ति में,
हो जाना मशगूल उड़ रही
आगे पीछे धूल……….
पाकर दौलत श्रम ना छोड़ो,
कभी भी अपना कर्म ना छोड़ो
प्रलोभन में किसी के आकर,
कभी भी अपना धर्म ना छोड़ो
जीवन रूपी इस बगिया में,
खिलेंगे सुन्दर फूल उड़ रही
आगे पीछे धूल………..










