समय है कि कुछ तुझको उपहार दूं मैं।
समय है कि कुछ तुझको उपहार दूं मैं।
ना एक बार ही बल्कि सौ बार दूं मैं॥
रहे लाज आँखों में संयम जुबां पर।
हर एक कदम तू उठाना संभल कर ॥
जो निन्दा करे कोई नारी किसी की।
तो जाहिर न करना कभी राय अपनी ॥
मुनासिब है उस वक्त केवल खामोशी।
करेगी नहीं वरना खुद तेरी चुगली॥
तेरे सर पै आ जायेगी सब बुराई।
यूं घर बैठे तू मोल लेगी लड़ाई॥
अगर यह अलंकार स्वीकार होगा।
तो तेरा भी आदर्श परिवार होगा।










