सकल ब्रह्माण्ड के रक्षक स्वामी हो
सकल ब्रह्माण्ड के रक्षक स्वामी
होऽऽऽ
रक्षा करते
जो मन में समाया
वो कौन है?
प्रभु तू ही
अग्निदेव ! हुए दर्शन तेरे
प्रीति-संयम सत्य हुए मेरे
यज्ञ रूप यजमान बनाया
जो कौन है ?
प्रभु !तू ही
सकल ब्रह्माण्ड के रक्षक स्वामी
होऽऽऽ
रक्षा करते
जो मन में समाया
वो कौन है?
प्रभु तू ही
‘नर्य’ हो गया यज्ञ तेरे कारण
मित्रता उद्देश्य हुआ धारण
वैर-विद्वेष को हटाया
वह कौन है?
प्रभु ! तू ही
सकल ब्रह्माण्ड के रक्षक स्वामी
होऽऽऽ
रक्षा करते
जो मन में समाया
वो कौन है?
प्रभु तू ही
मेरा संयम, भीरुता ना समझो
धीरता परिणत रूप ही समझो
सत्य ने मस्ताना बनाया
वह कौन है ?
प्रभु ! तू ही
सकल ब्रह्माण्ड के रक्षक स्वामी
होऽऽऽ
रक्षा करते
जो मन में समाया
वो कौन है?
प्रभु तू ही
हे अग्नेश !! सफल करो यज्ञ
बन जाओ प्रिय पथिप्रज्ञ
चाहे ना दे धन जग-माया
वह कौन है?
प्रभु तू ही
सकल ब्रह्माण्ड के रक्षक स्वामी
होऽऽऽ
रक्षा करते
जो मन में समाया
वो कौन है?
प्रभु तू ही
आचार-मर्यादा की शिखाएँ
है यज्ञ कुण्ड कि मेखलाएँ
यज्ञ-पंक्ति में जाके बिठाया
वह कौन है ?
प्रभु ! तू ही
सकल ब्रह्माण्ड के रक्षक स्वामी
होऽऽऽ
रक्षा करते
जो मन में समाया
वो कौन है?
प्रभु तू ही










