सफलं भवतु सफलं भवतु ….
सफलं भवतु सफलं भवतु ….
शुभम् भवतु सुगमम् भवतु
कल्याणं भवतु मंगलम् भवतु,
आरोग्यं भवतु सफलं भवतु…
हे लक्ष्य वीर ! तुम सफलं भवतु ॥
दृढ़ संकल्प लिए जीवन में,
श्रद्धा से तुम भरो उड़ान।
प्रथम मंत्र इसे तुम जानो,
धारण कर तुम बनो महान ॥
निशदिन तुम करना अभ्यास,
अपने पर रखना विश्वास ।
जगे ! मन में बस ये प्यास …
सफलं भवतु सफलं भवतु ….
हे श्रद्धावान ! तुम सफलं भवतु ॥
काल करे सो करो वो आज,
करते समय पे जो सब काज।
विजय का सपना मन में लेकर,
बढ़ें, हो उन्नत देश समाज ॥
निरंतरता का रखे जो ख्याल,
जीवन उसका बने निहाल ।
उठे ! मन में बस ये आश …
सफलं भवतु सफलं भवतु…
हे सतत वीर ! तुम सफलं भवतु … ॥
मुट्ठी में तुम ताकत लेकर,
बढ़ोगे जब तुम ऊर्जा पाकर ।
बल से वहाँ सफलता मिलती,
संघर्ष जहां हो जीवन शक्ति ।
उन्हें ही मिले सफल आभूषण,
सहन शीलता जिसका भूषण।
धारण कर मन में विश्वास …
सफलं भवतु सफलं भवतु…
हे सहनशील ! तुम सफलं भवतु ॥
जिस पर बैठो उसे ना काटो,
ज्ञान- दृष्टि से सब कुछ जाचों ।
हरपल जितना ज्ञान बढ़ाओ,
उतनी अधिक सफलता पाओ ।
समझ उत्साह आवेश की भाषा,
छोड़कर हताशा और निराशा
सहज धरो मन में ये आस…
सफलं भवतु सफलं भवतु…
हे उमंग वीर ! तुम सफलं भवतु ॥
इस रहस्य को जिसने समझा,
कब, कहाँ, कैसे, क्या करना,
सजग सदा जो रहे सावधान,
सफलता फिर उसकी पहचान ।
एकाग्रता से कर्म करें हम,
अपने लक्ष्य नियत करें हम
जब गुरु ज्ञान का मिले प्रकाश …
सफलं भवतु सफलं भवतु …
हे सजग प्रहरी ! सफलं भवतु ॥
जो जैसा उसको वैसा जाना,
बुद्धिमत्ता की निशानी है,
अर्थ का अनर्थ करे जो कोई,
ये ना समझी नादानी है।
राग-द्वेष-अहंकार को त्यागें,
काम-क्रोध-मद-लोभ- को जानें
जब मन लगाम हो अपने पास …
सफलं भवतु सफलं भवतु …
हे बुद्धि श्रेष्ठ ! तुम सफलं भवतु ॥
तीव्र संवेग को सब पहचानें,
सही गति सही दिशा को जानें
तेज गति से जो भी दौड़ा,
असफलता को पीछे छोड़ा ॥
सम्पूर्णता को जिसने पाया,
शूरवीर पुत्त्र वो कहलाया।
रचा उसी ने फिर इतिहास …
सफलं भवतु सफलं भवतु …
हे शूरवीर ! तुम सफलं भवतु ॥
प्रतिपल प्रतिदिन किसी भी क्षण में,
अन्धकार ना हो जीवन में।
ज्ञान की ज्योति सदा तुम्हारे,
मन मंदिर में करें उजयारे ॥
भय से रहित हो सबका जीवन,
संघर्ष करें सब नम्र निवेदन
अज्ञान अविद्या ना हो पास …
सफलं भवतु सफलं भवतु…
हे वीर पुत्न ! तुम सफलं भवतु ॥
जो ईश्वर प्रणिधान को समझा,
वो बंधन में कभी ना उलझा।
ईश समर्पण सर्वस्व अर्पण,
पाकर जिसने किया समर्पण ॥
सफल हो उसका जीवन शेष,
लक्ष्य पर जिसका ध्यान ‘विशेष’
हो’ सफल नित कर अभ्यास …
सफलं भवतु सफलं भवतु…
हे आर्यवीर तुम सफलं भवतु










