सदियों से हमको अपनी,भूलों ने मार डाला।
सदियों से हमको अपनी,
भूलों ने मार डाला।
कांटों से बच गये थे,
फूलों ने मार डाला।।
समझौता हो गया था,
फांसी की रस्सियों से।
सावन में नई दुल्हन को,
झूलों ने मार डाला। ।1 ।।
कोई कितना ही बुरा हो,
उस पर भी रहम खाओ।
हमें इस उदारता के,
उसूलों ने मार डाला।।2।।
अपनों को गैर समझा,
गैरों ने अपने पन की।
आँखों में झोंक दी जो,
धूलों ने मार डाला। ।3।।
हम किसको दें बुराई,
‘प्रेमी’ हमें तो अपने।
आलस्य, प्रमाद ऊंघों,
टूलों ने मार डाला।।4।।










