सदियों से हमको अपनी,भूलों ने मार डाला।

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सदियों से हमको अपनी,भूलों ने मार डाला।

सदियों से हमको अपनी,
भूलों ने मार डाला।
कांटों से बच गये थे,
फूलों ने मार डाला।।

समझौता हो गया था,
फांसी की रस्सियों से।
सावन में नई दुल्हन को,
झूलों ने मार डाला। ।1 ।।

कोई कितना ही बुरा हो,
उस पर भी रहम खाओ।
हमें इस उदारता के,
उसूलों ने मार डाला।।2।।

अपनों को गैर समझा,
गैरों ने अपने पन की।
आँखों में झोंक दी जो,
धूलों ने मार डाला। ।3।।

हम किसको दें बुराई,
‘प्रेमी’ हमें तो अपने।
आलस्य, प्रमाद ऊंघों,
टूलों ने मार डाला।।4।।

सत्य गुणों की बढ़ती हो जग में यशेकीर्ति निरन्तर हो श्रेष्ठ ज्ञान विस्तार हेतु सन्तति शिक्षा सुन्दर तर हो अलभ पदार्थ प्राप्ति हेतु पुरुषार्थ धर्म अनुसार करें प्राप्त द्रव्य की रक्षा हो रक्षित का पुनः प्रसार करें