साधना की ब्रह्म लो जगाकर
साधना की ब्रह्म लो जगाकर,
हमने ज्ञान बढाया।
अब क्या जगत घटाए
हमको अब क्या जगत घटाए ।। टेक
मन में पाक विचार भरे हैं,
तन में कर्म भरे हैं।
शाश्वत ये हम सबका नाता,
शाश्वत विश्व भरे हैं ।।१।।
विश्व पताकाएं लख लख के
विश्व सूना है बनाया।
यश पुत्त वित्त आज़ाद रहें हम,
उन्मुक्ति फल पाएं ।। २।।










