सच्ची वाणी धरते हैं धीर हो

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सच्ची वाणी धरते हैं धीर हो

सच्ची वाणी धरते हैं धीर हो
सच्ची वाणी धरते हैं धीर
करते वातावरण सुहाना
होते ना कभी भी अधीर हो
सच्ची वाणी धरते हैं धीर हो

सत्तू छाने चलनी से जैसे
जैसे-जैसे छाने शुद्ध होवे वैसे
मन-वाणी शुद्ध हुई वैसे
वाणी ने किया श्रृंगार
जतन से
पाया मधु-उपहार
जतन से


वाणी बनी मधु-शीर
सच्ची वाणी धरते हैं धीर,
सच्ची वाणी धरते हैं धीर
सच्ची वाणी,
सच्ची वाणी,
सच्ची वाणी धरते हैं धीर रे
धरते हैं धीर


सच्ची वाणी धरते हैं धीरे रे
सच्ची वाणी धरते हैं धीर रे
वाणी,
धरते हैं धीर,
धरते हैं धीर
धरते हैं धीर

शुद्धिकरण वाणी का कठिन है
प्रज्ञावान ही इसमें जतिन है
चिन्तन-मनन ही सच्चा साधन
वाणी जो करे प्रवीण हो
सच्ची वाणी धरते हैं धीर रे
वाणी,
धरते हैं धीर,
धरते हैं धीर
धरते हैं धीर

जैसे प्रयत्न करते जाते
मधुर अवस्था वाणी की पाते
प्रीत झरे निर्मल शब्दों के
बहता प्रीत का नीर हो
सच्ची वाणी धरते हैं धीर रे
सच्ची वाणी धरते हैं धीर

आए जिसकी वाणी में तेज
पा जाते लक्ष्मी की सेज
जिस ऐश्वर्य की नाव में बैठे
पाये सुखद प्रतीर रे
सच्ची वाणी धरते हैं धीर


सच्ची वाणी,
सच्ची वाणी ,
सच्ची वाणी धरते हैं धीर रे,
धरते हैं धीर
सच्ची वाणी धरते हैं धीर रे
सच्ची वाणी धरते हैं धीर रे
वाणी,
धरते हैं धीर,
धरते हैं धीर,
धरते हैं धीर