सच्चाई छुप नहीं सकती, बनावट के असूलों से।

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सच्चाई छुप नहीं सकती, बनावट के असूलों से।

सच्चाई छुप नहीं सकती,
बनावट के असूलों से।
कि खुशबू आ नहीं सकती,
कभी कागज के फूलों से।

सच्चाई छुप नहीं सकती,
बनावट के न अग्नि खेत को सर्सीचे,
न जल कपड़े सुखाता है।
न पर्वत बल से हिलता है,
न नभ मुट्ठी में आता है।
हवाएँ किसने रोकी हैं,
भला तिनकों से धूलों से।
सच्चाई छुप नहीं सकती, बनावट के ….

यह दुनियाँ कायम है अब तक,
प्रभु के सत्य नियमों पर।
हमारी जिन्दगी भी है,
तो है यह सत्य पर निर्भर।
कहीं पर डगमगाती है,
तो बस अपनी ही भूलों से।
सच्चाई छुप नहीं सकती, बनावट के……

यहाँ हर एक प्राणी को,
कर्म फल प्राप्त होते हैं।
कई हँस हँस के खाते हैं,
कई चख चख के रोते हैं।
मिलेंगे फूल क्या उनको,
मुहब्बत जिन की शूलों से।
सच्चाई छुप नहीं सकती, बनावट के ….

छुपा कर लाख परदों में,
करोगे काम जो काला।
वहाँ भी देख ही लेगा,
‘पथिक’, वह देखने वाला।
बचाए बच न पाओगे,
देवताओं रसूलों से।
सच्चाई छुप नहीं सकती, बनावट के…….