सच्चा तु करतार है

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सच्चा तु करतार है

सच्चा तु करतार है,
सबका पालनहार है।
तेरा सबको आसरा,
सुखों का भण्डार है ॥

नदियाँ नाले पर्वत सारे,
तेरी याद दिलाते हैं।
ऋषि, मुनि और योगी सारे,
तेरे ही गुण गाते हैं ।

बादल गर्जे, बिजली चमके,
छम-छम वर्षा आती है।
मीठी वाणी कोयल बोले,
यह ही राग सुनाती है ॥

“सत्-चित्त-आनन्द” प्रभु को,
वेदों ने बतलाया है।
बिन कर कर्म करें विधि
नाना रामायण में आया है ।

शुभ कर्मों से मानव का यह
सुन्दर चोला पाया है।
विषय-विकारों में फँसकर,
इसको दाग लगाया है ॥

‘नन्दलाल’ कहे श्रद्धा से,
चरणों में शीश झुकाते हैं।
बल बुद्धि और विद्या का
हम दान आपसे चाहते हैं ॥