सब मिल कर ईश्वर को ध्याओ

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ईश्वर को ध्याओ

(तर्ज – हुआ ध्यान में ईश्वर के जो मगन उसे कोई…)

सब मिल कर ईश्वर को ध्याओ
जो सब का पालनहारा है।
रक्षक है दीनों अनाथों का
और हर दुःखिया का सहारा है।
सब मिल कर ईश्वर को ध्याओ………

१. वह घट घट अन्तर्यामी है।
कुल सृष्टि का वह स्वामी है।
और ओम् नाम का नामी है
वेदों ने यही उचारा है।
सब मिल कर ईश्वर को ध्याओ……….

२. ये सूरज चाँद बनाए हैं।
क्या सुन्दर दीप जलाए हैं।
बादल नभ से बरसाए हैं
अद्भुत हर एक नज़ारा है।
सब मिल कर ईश्वर को ध्याओ……….

३. अन्धेरा है कि उजाला है।
सब को वह बनाने वाला है।
हर काम जगत् में आला है
दुनियाँ में सब से न्यारा है।
सब मिल कर ईश्वर को ध्याओ…….

४. वह निकट भी है और दूर भी है।
कण कण में रमा भरपूर भी है।
जग में सब से मशहूर भी है
उसका नहीं कोई किनारा है।
सब मिल कर ईश्वर को ध्याओ…..

५. सब मोर पपीहे गाते हैं।
मधु स्वर से उसे बुलाते हैं।
योगी जन उसको ध्याते हैं
भगवान सभी का प्यारा है।
सब मिल कर ईश्वर को ध्याओ………..

६. नर जीवन का है सार वही।
सुख सम्पत्ति का भण्डार वही ।
जड़ चेतन का आधार वही
जो रक्षक ‘पथिक’ हमारा है।
सब मिल कर ईश्वर को ध्याओ……….